Also published with the name ‘Dharti Ka Swarg’
दीनानाथ और मुरलीधर लोगों को जुए के लिये प्रोनोट लिखवाकर उधार देकर अपनी जेबें भरते थे । एक दिन जब मुरलीधर की लाश बरामद हुई तो आम धारणा यही थी कि ऐसे ही किसी प्रोनोट के शिकार ने उसका काम तमाम किया था ।