जो गम हद से ज्यादा हो, खुशी नजदीक होती है, चमकते हैं सितारे, रात जब तारीक होती है। जब नाम सोहल हो तो गिर गिर के संभलना पड़ता है। तो मर मर के जीना पड़ता है। कदम लड़खड़ाते हों तो भी मजबूती से पैरों पर खड़ा होना पड़ता है। नीलम की मौत ने उसके वजूद का पुर्जा पुर्जा बिखेर दिया था तो भी अपनी व्यक्तिगत त्रासदी से उबरना लाज़िम था। हँस कर दिखाना जरूरी था भले ही दिल रोता हो।